Sanjay Manjrekar attacks Ajit Agarkar and BCCI over Yashasvi Jaiswal’s exclusion – संजय मांजरेकर ने यशस्वी जायसवाल को बाहर करने पर बीसीसीआई और अजीत अगरकर पर साधा निशाना
भारतीय चयन समिति के फैसलों पर उठे सवाल
भारतीय क्रिकेट में चयन को लेकर बहस होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार पूर्व भारतीय बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने सीधे तौर पर बीसीसीआई और अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति को आड़े हाथों लिया है। मामला अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए चुनी गई टीम का है, जिसमें यशस्वी जायसवाल और साई सुदर्शन जैसे होनहार युवाओं को नजरअंदाज कर दिया गया है।
यशस्वी जायसवाल की अनदेखी पर भड़के मांजरेकर
संजय मांजरेकर का मानना है कि यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ी, जिन्होंने अपनी पिछली वनडे पारी में नाबाद 116 रन बनाए थे, उन्हें टीम से बाहर रखना न केवल गलत है, बल्कि चयनकर्ताओं को इसके लिए उनसे माफी मांगनी चाहिए। मांजरेकर ने कहा कि जिस खिलाड़ी ने कठिन स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है, उसे टीम से बाहर कर देना समझ से परे है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जायसवाल अपने करियर के चरम पर हैं और भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं।
अनुभवी खिलाड़ियों बनाम युवा प्रतिभा
चयन समिति ने रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा जताना जारी रखा है, जबकि मांजरेकर का तर्क है कि अब भारतीय टीम को भविष्य की ओर देखने की जरूरत है। उन्होंने सवाल किया कि फिटनेस और फॉर्म के मुद्दों के बावजूद रोहित शर्मा को टीम में क्यों शामिल किया गया? मांजरेकर के अनुसार, चयनकर्ताओं की दृष्टि साफ नहीं है और वे पुरानी परंपराओं से चिपके हुए हैं।
साई सुदर्शन और अन्य युवा खिलाड़ियों का भविष्य
मांजरेकर ने केवल जायसवाल ही नहीं, बल्कि साई सुदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘साई सुदर्शन ने शीर्ष क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए शानदार अर्धशतक लगाए हैं। यदि आप गिल, सुदर्शन और जायसवाल के रूप में एक बेहतरीन शीर्ष तीन तैयार कर सकते हैं, तो आप उनका समर्थन क्यों नहीं कर रहे हैं?’ उनका मानना है कि अगर इन युवाओं को लगातार 10 पारियां दी जाएं, तो वे वही आंकड़े पेश करेंगे जो वर्तमान में कोहली और रोहित के नाम हैं।
चयन समिति के सामने चुनौती
अजीत अगरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति के लिए यह सीरीज कई मायनों में कठिन रही है। जहां एक ओर रविंद्र जडेजा और मोहम्मद शमी चोट के कारण बाहर हैं, वहीं दूसरी ओर टीम में प्रिंस यादव, गुरनूर बरार और हर्ष दुबे जैसे नए चेहरों को मौका दिया गया है। लेकिन यशस्वी जायसवाल का बाहर होना चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। जायसवाल का वनडे करियर अभी शुरुआती दौर में है, जहां उन्होंने 4 मैचों में 57 की औसत और 86 के स्ट्राइक रेट से 171 रन बनाए हैं।
क्या भारतीय क्रिकेट के लिए यह सही दिशा है?
मांजरेकर का सीधा आरोप है कि चयन समिति को भारतीय क्रिकेट के भविष्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आप केवल मौजूदा दिग्गजों पर ही ध्यान केंद्रित करते रहेंगे, तो नई पीढ़ी के खिलाड़ियों का विकास रुक जाएगा। उनके अनुसार, क्रिकेट में निरंतरता और फॉर्म के आधार पर बदलाव करना आवश्यक है, न कि केवल नाम के आधार पर टीम का चयन करना।
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय टीम के चयन को लेकर प्रशंसकों और विशेषज्ञों में भारी असंतोष है। अफगानिस्तान सीरीज में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय टीम कैसा प्रदर्शन करती है और क्या चयनकर्ताओं का यह फैसला सही साबित होता है या फिर युवाओं को बाहर रखने का खामियाजा टीम को भुगतना पड़ता है। संजय मांजरेकर की यह टिप्पणी स्पष्ट करती है कि अब भारतीय क्रिकेट में बदलाव का समय आ गया है और चयन समिति को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है।